➤ हिमाचल में 21 हजार मिड डे मील वर्कर आज हड़ताल पर
➤ 17 साल से मानदेय नहीं बढ़ने का आरोप, सचिवालय का करेंगे घेराव
➤ हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 12 महीने का भुगतान न मिलने पर नाराजगी
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 21 हजार मिड डे मील (MDM) वर्कर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को राज्यव्यापी हड़ताल पर उतर गए हैं। सीटू (CITU) के बैनर तले मिड डे मील वर्कर राजधानी शिमला में सचिवालय का घेराव करेंगे। इसके लिए टॉलैंड से सचिवालय तक आक्रोश रैली भी निकाली जाएगी। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे वर्करों ने सरकार पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
मिड डे मील वर्करों का कहना है कि वे पिछले 10 से 15 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें मात्र 4500 रुपए मासिक मानदेय दिया जा रहा है। बढ़ती महंगाई के दौर में इतने कम मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद मुश्किल हो गया है। वर्करों का आरोप है कि उनकी मेहनत और योगदान के मुकाबले उन्हें बेहद कम आर्थिक सहायता मिल रही है।
हड़ताल का असर प्रदेश के करीब 8 हजार सरकारी स्कूलों में देखने को मिल सकता है। स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि शिक्षा विभाग ने इस स्थिति से निपटने के लिए शिक्षकों को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मिड डे मील वर्करों का आरोप है कि उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार की मिड डे मील योजना के तहत हुई थी, लेकिन पिछले 17 वर्षों में केंद्र सरकार ने उनके मानदेय में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की। वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से केवल 1000 रुपए और राज्य सरकार की ओर से लगभग 3500 रुपए दिए जा रहे हैं। वर्करों की मांग है कि उन्हें हरियाणा की तर्ज पर 7000 रुपए मासिक मानदेय दिया जाए।
सीटू नेता जगत सिंह ने कहा कि अधिकांश मिड डे मील वर्कर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में विधवा और एकल महिलाएं शामिल हैं, जिन पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय देकर शोषण किया जा रहा है।
वर्करों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें साल में केवल 10 महीने का मानदेय दिया जाता है। स्कूलों की दो महीने की छुट्टियों के दौरान भुगतान नहीं किया जाता। जबकि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है कि मिड डे मील वर्करों को 12 महीने का मानदेय दिया जाए। इसके बावजूद आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
मिड डे मील वर्करों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आज सचिवालय घेराव के दौरान सरकार के समक्ष उनकी प्रमुख मांगों को मजबूती से रखा जाएगा।



